रावण का पुतला हवा में गिरता क्यों नहीं? इंजीनियरिंग समझिए
बाँस, कागज़ और रस्सियों से बना कई मंज़िल ऊँचा पुतला हवा और अपने वज़न के बीच कैसे संतुलन बनाता है: फ़्रेम, त्रिभुज, नीचे भारी आधार और ज़मीन से बँधे तार।

दशहरे पर दिल्ली के रामलीला मैदानों में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले कई मंज़िल ऊँचे खड़े होते हैं। ये लोहे या कंक्रीट के नहीं, बाँस, कागज़ और कपड़े के बने होते हैं। फिर भी अक्टूबर की हवा में ये गिरते क्यों नहीं? जवाब चार इंजीनियरिंग विचारों में है।
1. बाँस: हल्का पर मज़बूत
बाँस अपने वज़न के हिसाब से बहुत मज़बूत होता है और खिंचाव तथा दबाव दोनों सह लेता है। यह थोड़ा लचीला भी है, इसलिए हवा का झोंका आने पर टूटने की बजाय झुककर वापस आ जाता है। पूरा ढाँचा बाँस का एक फ़्रेम होता है, और कागज़ सिर्फ़ उसकी खाल है।
2. त्रिभुज: सबसे स्थिर आकार
चौकोर फ़्रेम धक्का लगने पर तिरछा हो जाता है, पर त्रिभुज अपना आकार नहीं बदलता। इसलिए फ़्रेम में तिरछी पट्टियाँ (bracing) लगाई जाती हैं जो हर खाने को त्रिभुजों में बाँट देती हैं। यही तरीका पुलों और बिजली के टावरों में भी दिखता है।
3. नीचे भारी, ऊपर हल्का
कोई भी चीज़ तब तक नहीं गिरती जब तक उसका गुरुत्व केंद्र (center of gravity) आधार के ऊपर रहे। इसलिए पुतले का निचला हिस्सा चौड़ा और भारी रखा जाता है, और ऊपर का सिर और मुकुट हल्के कागज़ के। आधार जितना चौड़ा, गिराने के लिए उतना बड़ा धक्का चाहिए।
4. हवा से लड़ाई: तार और खूँटे
बड़े पुतले की सतह बहुत बड़ी होती है, इसलिए हवा उसे एक पाल की तरह धकेलती है। इसे रोकने के लिए पुतले को अलग-अलग दिशाओं में रस्सियों या तारों से ज़मीन में गड़े खूँटों से बाँधा जाता है (guy wires)। हर तार हवा के धक्के का एक हिस्सा ज़मीन तक पहुँचा देता है। बड़े पुतले अक्सर हिस्सों में बनाकर क्रेन से जोड़े जाते हैं।
Frequently asked questions
रावण का पुतला किससे बनता है?
आम तौर पर बाँस के फ़्रेम पर कागज़ और कपड़ा चढ़ाकर, और अंदर पटाखे रखकर।
बड़ा पुतला हवा में क्यों नहीं गिरता?
त्रिभुजों वाला बाँस का फ़्रेम, नीचे भारी और चौड़ा आधार, और अलग-अलग दिशाओं में ज़मीन से बँधे तार हवा के धक्के को सह लेते हैं।